सुना है मेरे शहर की हवा में जहर है.
चलो मिल के इसे साफ करते हैं। .
हर एक नयी सुबह पे एक नयी शुरआत करते हैं.. .. !!
न जाने क्यूँ अब ठंड नहीं लगती है जाड़ो में
न जाने क्यूँ बादल नहीं बरसते हैं अब बरसातों में।
ये कैसी धुंध झाई है फ़िजा में,सितारे अब नहीं दीखते है रातो में
थोड़ा खुदगर्जी से बाहर निकलते हैं, थोड़ा इंशान बनते हैं..
हर एक नयी सुबह पे एक नयी शुरआत करते हैं.. .. !!
कहीं ऐसा न हो जाये की आने वाली नश्लें ,
बीमार जिगर के साथ जवान हों ,
इंशान, इंशान नहीं बिमारियों का
चलता फिरता मकान हो.. !
तरक्की जरुरी है मगर ,
थोड़ा ख्वाहिशों पर भी एहतियाद रखते हैं
हर एक नयी सुबह पे एक नयी शुरआत करते हैं.. .. !!
सुना है मेरे शहर की हवा में जहर है.
चलो मिल के इसे साफ करते हैं। .
हर एक नयी सुबह पे एक नयी शुरआत करते हैं.. .. !!
#विश्व पर्यावरण दिवस
#अमित