आज़ादी के दीवाने, स्वतंत्रता समर के महानायक, निस्वार्थ सर्वस्व न्योछावर करने वाले माँ भारती के सच्चे सपूत-चंद्रशेखर आज़ाद को समर्पित:

 

है तुझको नमन, अभिनंदन,वन्दन हे वीर "आज़ाद"

तुझ सा प्रतापी ना अवतरित हुआ ना होगा तेरे बाद..।।

 

समय काल के प्रभाव ने किशोर को बना दिया था वयस्क..

पड़ती रही बेत की मार पर आँख से ना निकला अश्क़..।।

हैरान थी जनता देखकर ,बैरी गोरे हो गए त्रस्त..।।

 

बस एक धुन में वो गा रहा था इंक़लाब ज़िंदाबाद-इंक़लाब ज़िंदाबाद..

है तुझको नमन, अभिनंदन,वन्दन हे वीर "आज़ाद"..।।

 

परशुराम का अवतार था वो , सरफ़रोशों की हुंकार था वो...

उसको नहीं था मृत्यु का भय हर क्षण मरने को तैयार था वो.।।

जिसके नाम से दंग थे बैरी  एक ऐसी ललकार था वो..

उसके हुंकार से हिल गया था ब्रितानी साम्राज्यवाद..

है तुझको नमन, अभिनंदन,वन्दन हे वीर "आज़ाद"..।।

 

आज़ादी ही ध्येय था उसका , बहरी हुकूमत को जगाना था.

सर पे बाँधे कफ़न घूमता वो ऐसा आज़ादी का दीवाना था..।।

शेर घिरा था आलफ़्रेड में,किसी अपने ने कर दिया था घात..

पर  जब तक जिया आज़ाद जिया और मरा आज़ाद..

है तुझको नमन, अभिनंदन,वन्दन हे वीर "आज़ाद"..।।

 

#अमित त्रिपाठी