अगर ज़िन्दगी एक खेल है
तो ज़िन्दगी क्या है
अगर अपनों से हारने
और जीतने की बात है,
तो ये हार क्या है,
ये जीत क्या है
इश्क़ का मुकम्मल होना अगर बस है
तेरा मेरी हो जाना,
और अगर उसके बिना कोई
राबता नहीं है अपना,
तो ये मरासिम क्या है
ये आशिकी क्या है
कहते हो ना कि भरोसा है मुझपे,
तो क्यू मेरे हर कदम पे
मेरे पैर के मुहर की रेत छानते हो,
क्या ढूँढते हो? क्या पाते हो?
अगर ये भरोसा है
तो भरोसा क्या है
अगर हार के भी जीतने की होड़ जारी है,
या जीत के भी, पुरसुकुन नहीं हो अब तक
अगर जंग में जायज़ है सब
और ज़िन्दगी एक जंग है महज़
तो ये दोस्ती ये यारी क्या है
अगर मर्ज़ नहीं है ऐसी ज़िन्दगी
तो ये तीमारदारी क्या है
अगर ज़िन्दगी बस एक खेल है,
कि तुम मुझसे जीतो,
या मैं तुमको जीतूं,
तो ज़िन्दगी क्या है