मेरे कविता संग्रह "कुछ इधर की कुछ उधर की" से
फ़ादर्स डे
प्रेरणा कही भी आ सकती है
आज नहाते हुए आ गयी
कल से सोच रहा था फ़ादर क्या होता है।
सवाल ही ग़लत है
सवाल होना चाहिए फ़ादर क्यों होता है।
फ़ादर वो दरख़्त है
जिसे धूप,गरमी,बरसात,तूफ़ान में
बस एक जगह मज़बूती से खड़े रहना है
उसके फूल,फल उसके लिए नहीं हैं
वो तो पत्थर मारने वालों के लिए हैं
पंछी आएँगे घोसला मनाएँगे
और उड़ जायेंगे
उम्र के साथ गिर भी गया
तो उसके टुकड़े किसी के घर का
चूल्हा ही जलायेंगे।


