क्या मैं सचमुच बड़ा हो गया हूँ?


बड़ी बधाइयाँ आ रही हैं कल से

जी हाँ मैं सतरा गया हूँ

दस साल पहले सठियाया था

और अब सतरा गया हूँ

फ़ेस्बुक वालों की बधाइयाँ आ गयीं

कुछ जानने वालों ने फ़ोन भी किया

बधाइयाँ दीं, कुछ बिज़ी थे

चलता है,

मैंने भी तो नहीं दी थी।


पर मैं सोच रहा था

मैं इकहत्तर का हो गया

इसमें मेरा क्या रोल है?

सिवाय इसके की मैं ज़िंदा हूँ अभी तक।


क्या मेरी सोच बड़ी हुई?

शायद,लेकिन वो तो पहले भी थी।

क्या दूसरों की मदद करने का

मेरा माद्दा बढ़ा है?

बिलकुल नही,बल्कि कम ही हुआ होगा

अपने काम से काम रखो

नया फ़ण्डा है।

क्या मेरी हिम्मत बढ़ी है

सोच में शायद

पर ज़मीन पर,ज़ीरो।


क्या इकहत्तर सालों में

आज़ादी बढ़ी है

सवाल ही हास्यास्पद है।

मुझे तो लगता है

हमने अपने आस पास

शक,कुंठा,अपने पराए ,नफ़ा नुक़सान की

ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच ली है

जिसके पार

सिर्फ़ अट्टहास करता रावण दिखता है

जिसे हमने इतने सालों में

दस के बजाय

सौ नए सिर दे दिए हैं।