
करोना की दोस्ती
मेरी और इस कबूतरी में अब मूक सहमति हो चुकी है
करोना से पहले
अगर वो बाल्कनी की जाली के अंदर आने की गुस्ताखी करती थी
तो मैं ग़ुस्से में उसके आने जाने के रास्ते बन्द करने लगता था
यह फ़रवरी की बात है और हम रोज़
'मेरा घर' 'तेरा घर' खेलते रहते थे।
फ़रवरी में मैं मुम्बई गया
और फिर करोना आ गया
मैं छः महीने बाद वापस घर आया
हालात बदल चुके थे।
वो कबूतरी अब बाल बच्चेदार हो चुकी थी
अब मेरा घर और उसका घर साझा घर था
उसके बच्चे मेरी बाल्कनी में पल रहे थे
उन्हें इस हालात में धक्के देकर निकालना
तो पक्
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