पुनः मूषक भव:


सच तो यह है कि इस समय हम सब मूषक योनि में आ चुके हैं। हममें से बहुतों ने गिरगिट की तरह रंग बदले, कुछ खरगोश की तरह चपलता दिखा कर चांद और मंगल की जमीन के प्रापर्टी डीलर बन गये, हमारे जैसे पत्रकार अपने को 'वाच डाग' समझने लगे, जो ज्यादा खूंखार थे वो शेर बनकर शिकार करने लगे।


लेकिन फिर आ गया करोना जिसने सबको 'वो झटको दियो कि घनी दूर जा गिरयो'


ऊपर वाले ने कहा "पुनः मूषक भव" और हम सब गिनी पिग बन गये हैं,यानि चूहे,जिन पर रोज़ नये प्रयोग हो रहे हैं।चल गया तो ठीक नहीं तो अगला चूहा तैयार है मानव जाति के सुनहरे भविष्य के लिए कुर्बान होने को तैयार।