पेड़ की कहानी


एक था पेड़

अपने आप में संपूर्ण

जंगल में खड़ा अकेला अपनी शान में अकड़ा


एक दिन एक कोमल नाज़ुक लता बढ़ी

पेड़ को गले लगाने के लिए

और पेड़ गदगद

झुक गया पूरा उसे सहारा देने के लिये


थोड़े दिनों में सिलसिला आगे बढा

लताएँ अब चारों तरफ़ से आगे बढ़ने लगीं

और देखते देखते

पेड़ का गला घुटने लगा


लताएँ अब बढ़ कर पेड़ से बड़ी हो गयीं

और पेड़ खोखला होता चला गया

अपने आख़िर अंजाम

के लिए तैयार।


क्या जंगल के और पेड़

इससे कोई सबक़ लेंगे

या औरों के लिए अपनी जान देते रहेंगे?