आज हम फिर आजाद हो गये

बधाई हो

एक बार नहीं

अब हम 73 बार आजाद हो चुके हैं

क्यों ये आजादी एक बार में पूरी नहीं होती

जो हर साल हमें आजाद होना पडता है


अंग्रेज चले गये 1947 में

अच्छा ही हुआ

फूट डाल कर

भारत के दो टुकड़े करने वाले

देश छोड़ कर चले गये


तो अब 73 साल बाद

क्यों है लोगों में इतनी नफरत

अब मुर्दाबाद से भी भयानक लगते हैं नारे

क्यों धमकिया

सरे बाजार मिलती हैं

जान की, धर्म की, ईमान की, इज़्ज़त की

और कोई देखता तक नहीं


क्या गरीबी से

अंध विश्वास से

अशिक्षा और

जहालत से

आजादी

मिल गयी?


कौन है इस आजादी का

झंडा बुलंद करने वाला

किसान, नौजवान, महिला, मजदूर?


आखिर किसकी आजादी का

जश्न मनाये जा रहे हैं हम

साल दर साल दर साल?