प्रेम उसे ही रूचेगा, जिसने घृणा 

का विष पिया हो,

प्रेम उसे ही फबेगा, जिसने पैरों

की बिवाईयों को सिया हो,

प्रेम उसे ही रंगेगा, जिसने गहन

कालिमा आंखों में लिया हो,

प्रेम उसे ही फलेगा, जिसने फूल

नहीं कांटों को अधर दिया हो।

~ हिमवान