मन के कोने में झांककर
देखे हो कभी
अपने नहीं, उसके मन में
जिसका मन मन से भी भारी
रहता है
उस वक्त जब जी तुम्हारा हल्का
रहता है
जी हल्का तुम्हारा इसलिए
रहता है, क्योंकि पास तुम्हारे
तुम्हारी अटारी बड़ी भारी होती है
भारी रहता है जबकि मन उसका
क्योंकि उसके पास हल्की फुल्की
बस सांस जितनी भारी कोई चीज
होती है
पर यकीन जानो हल्की सांस भी
उसकी, तुम्हारे जी हल्का होने पर
भारी पड़ जाएगी
जब देखोगे तुम उसको
ये देखते कि
वो देख सकता है अपने बेटे को
स्लेट पर माँ के ऊपर चन्द्रबिन्दु
लगाते, और नन्ही बेटी को
पहली बार हल्के से पांव उठाते।
~Himwan


