तुम्हारा काफ़िर, और मेरा विधर्मी,

मिलते हैं जब दोनों, किसी संयोग,

उपजाते हैं धर्म नया, कहते हैं जिसे

प्रतिरोध...प्रतिरोध...प्रतिरोध...

~ हिमवान