आमिर और अक्षय,
शाह रूख़ और संजय
फिल्में देखीं, धर्म कब देखा?
कद्र की मीना की, माना अपना
शबाना हो या रेखा
मेरे पास मां है, निरूपा के लिए
शशि के थे जज़्बात
पूछा क्या कभी, सलीम-जावेद ने
कैसे लिख दिए ये अल्फाज़
महबूब की मदर इंडिया बनी नरगिस
गुरु दत्त की प्यासा में वहीदा ही थी कशिश
कहा क्या, ईमान का ये घालमेल क्यों किया?
अरे लब बोल पड़े ख़ुद ब ख़ुद जब
कान्हा आन पड़ी तेरे द्वार
सायरा ने गुनगुनाया
हिंदुस्तान है ये खुदा गवाह बनता है यहां
अमिताभ की ज़ुबान से
और खुशी ले के आया चांद ईद का
कई मर्तबा लता की तान से
डर लगता है मत कहो
ऐ कायनात के सितारों
भारत एक नेमत है, ईश्वरीय दुआ है
मुमताज़ बेगम उर्फ मधुबाला
यूसुफ़ उर्फ दिलीप यहीं के है
और अकबर भी इस धरती पर
पृथ्वीराज हुआ है.
~ हिमवान


