सियासत लड़ा रही है लड़ रहे हैं हम

वो नज़दीकी शख्स कोई दूर का है, करा रहे हैं वहम।

यहां की माटी, यहां श्मशान और कफ़न है उसका

ना बांटो मेड़ों को मेड़ों से, इतना रहम बस इतना रहम।।