लिखता हूं लफ्ज़, हर अल्फाज़ मिटाता हूं

अपने विचार को अपने विचार से दबाता हूं।

उकेरता नहीं चित्र अब भविष्य के कागज पर ,

मैं नदी किनारे मिट्टी के घरौंदे बनाता हूं।।