तुम्हारा ख्वाब हूँ, लेकिन मुकम्मल हो नहीं सकता जो फ़िर से लौट आयेगा, मैं वो पल हो नहीं सकता क्या मालूम है तुमको, कि कैसे मर के जीते हैं जो टाला आज है तुमने, वो फ़िर कल हो नहीं सकता