
सीधी सी कोई बात, अब समझाऊँ मैं किसको
मेरी बात के, सबने, अपने मतलब निकाले हैं
जवाब मुंहतोड़ देंगे वो, आकर गिरेंगे जब
आसमां पर जो हमने, पत्थर उछाले हैं
कोई रिश्ता क्या चाहता है, इक समर्पण भाव ही
तुम मेरे हवाले हो, हम तेरे हवाले हैं
कहीं दंगा, कहीं हिंसा, कैसी जलन है ये
किस बात की नफरत ने, इतने दिल उबाले हैं
आज तो कोई अच्छी खबर होगी
यही सोचकर हमने, कितने पेपर ख
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