मैं समुंदर बनूँ, तुम किनारा बनो मेरी लहरों का कोई सहारा बनो   जमीं मैं बनूँ, तुम भी बादल बनो बरस जाये जो, ऐसा सावन बनो   हूँ शाम मैं, पर, सुबह तुम बनो फ़िर से जगने की मेरी, वजह तुम बनो   करूँ इश्क मैं, तुम मोहब्बत बनो बनूँ ख्वाब मैं, तुम हकीकत बनो...