
हुस्न की तारीफियां करती रहेंगी महफिलें
झुर्रियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
हाले दिल की दास्तां नजदीकियों को क्या पता
दूरियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
कब तलक गुमनाम होकर यूँ फ़ना होते रहें
सुर्खियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
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