हुस्न की तारीफियां करती रहेंगी महफिलें
झुर्रियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
हाले दिल की दास्तां नजदीकियों को क्या पता
दूरियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
कब तलक गुमनाम होकर यूँ फ़ना होते रहें
सुर्खियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
यूँ तो नज़रों से सुना, और कहा जाता रहा
शोखियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
प्यार के व्यापार में, सब सही होता नहीं
गल्तियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है
नरमियों से बात अक्सर तो फरेबी ही करे
तल्खियां अच्छी लगें तो, फिर समझिये इश्क है


