रोज़- रोज़ की बात नहीं है रोज़- रोज़ के अफ़साने हैं  रोज़- रोज़ यूँ तुमसे मिलना  क्या हम तेरे दीवाने हैं.... रोज़- रोज़ साँसों में हो तुम  रोज़- रोज़  एहसाँसों में  रोज़- रोज़ आँखों से मेरी  जो छलके वो पैमाने हैं....  रोज़- रोज़ सावन में हो तुम  रोज़- रोज़ की बारिश में  रोज़- रोज़ बूंदों से गिरकर मिलते हो या बहाने हैं .... #Amit