मंजिल तक पहुंचने की बचे राह ना कोई
इश्क में इस कदर भी हो गुमराह ना कोई
ख्वाहिश कोई नहीं और चाह ना कोई
जब दिल में बची हो, परवाह ना कोई
ग़म भी एेसा हो, जिसकी थाह ना कोई
सीने में दर्द हो, लबों पर आह ना कोई
जो तुझ पे मैं लिख दूँ, करे वाह ना कोई
खुद़ा से दूर जाकर, फिर पनाह ना कोई...