स्वर्ग हो जाये सारा जीवन हमारा प्रेम सच्चा अगर मिल जाये कहीं वरना ये जीवन निष्काम नीरस राख मुठ्ठी भर है और कुछ भी नहीं ;   प्रीत की छांव में जग ये मधुबन बने हम बने फूल-पत्ती या चन्दन बने लिपटे रहें हम भुजंगों के संग या माथे का तेरे बन्दन बनें ;   प्रेम की खोज में रेत हम हो गये आंधियों से दिशाओं में हम खो गये दूर तक जब नज़र कोई आया नहीं खुली आँख रखकर हम सो गये ||