दिल के पन्नों पर लिख न सको, तो, नाम तुम्हें कैसे दे दूं आगाज हमारा हो न सको, तो, अंजाम तुम्हें कैसे दे दूं जो पलकों के द्वारे छलके, गुनाह हमारे दिल के सारे फ़िर अश्कों की बात मान, इल्ज़ाम तुम्हें कैसे दे दूं लिप्त हो गये अक्षर सारे तकदीर हमारी लिखने में बिन अक्षर दिल की ख्वाहिश का पैगाम तुम्हें कैसे दे दूं मेरे बिन पल जी न सको, तो, ज़ान तुम्हें कैसे दे दूं और ज़ान हमारी हो न सको, तो, पहचान तुम्हें कैसे दे दूं