
दिल के पन्नों पर लिख न सको, तो, नाम तुम्हें कैसे दे दूं
आगाज हमारा हो न सको, तो, अंजाम तुम्हें कैसे दे दूं
जो पलकों के द्वारे छलके, गुनाह हमारे दिल के सारे
फ़िर अश्कों की बात मान, इल्ज़ाम तुम्हें कैसे दे दूं
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