जख्म भर जाते हैं, निशान रह जाते हैं

किसान मर जाते हैं, लगान रह जाते हैं

 

रिश्तों-रिवाजों के, बोझ तले दबकर 

घर टूट जाते हैं, मकान रह जाते हैं

 

अपने-पराये का, सब खेल चलता है

लोग मर जाते हैं, श्मशान रह जाते हैं

 

जवाब ढूंढते रहते हैं, ताउम्र जिनका

उन सवालों के, इम्तिहान रह जाते हैं

 

जिंदगी में कुछ असफलताएं भी जरूरी है

बहुत बातों से नहीं तो, अनजान रह जाते हैं

 

अजीब हाल है प्रश्नों का, इस प्रश्नपत्र में 

कठिन हल हो जाते हैं, आसान रह जाते हैं 

 

पूरी कौम पिसती है, मज़हब की लड़ाई में 

इंसान नहीं रहते, फरमान रह जाते हैं...

_Amit kumar Verma