अगर जिंदा नहीं हूँ, तो फिर मरा हूँ मैं
कुछ अच्छे तजुर्बों ने सिखाया है, कितना बुरा हूँ मैं
मुझे मतलब ही नहीं है तुम्हारी राजनीती से
फिर भी(जबरन),अगर भगवा नहीं हूँ, तो हरा हूँ मैं
लोहा समझता है, कोई...सोना समझता है
फिर लोग जला के देखते हैं, कि कितना खरा हूँ मैं
यहां सच सुनना सबको भारी सा लगता है
तभी ना जाने कितनी गिरी हुई नज़रों में गिरा हूँ मैं