न पहचान पाओ जो धड़कन हमारी
तो हमको न अपनी ख्वाहिश बताना...
सांसों से साँसें मिलें जब हमारी
पलट के ना तब तुम पलकें झुकाना...
मुकम्मल हैं सजदे वफ़ा में हमारी
दरिया को ना तुम अस्कों में लाना...
इक रोज होगी कहानी हमारी
ना पढ़ना उसे ना किसी को सुनाना... @