भले ही उठता ना हो मां बाप का बोझ
लेकिन उनका ज़नाजा तो उठायेगा जरूर
हर अर्थ का अनर्थ करके बैठा है
मगर अर्थी में आग लगायेगा जरूर
अपने से फुर्सत कहां कि गैरों का भला चाहें
हजार गुनाह करके भी हज पे जायेगा जरूर
पापों का क्या है, नहाने से धुल जाते हैं
जिसने किये हैं वो गंगा नहायेगा जरूर
तूफान है, कश्ती है, किनारे का पता नहीं
नाविक में हिम्मत है तो पार लगायेगा जरूर
ख़ुद को ही उठाने अगर "ख़ुद आ" जाओ तो
ख़ुदा तुम्हें मंजिल तक पहुंचायेगा जरूर
कब बयां हुआ है सच लफ़्जों से, जुबान से
कभी आंखों में देखो नज़र आयेगा जरूर
जिसको समझना होगा वो ऐसे ही समझ जायेगा
जिसको नहीं, वो प्रश्न उठायेगा जरूर...