अच्छा नहीं होता किसी की आँख में आना आंसू का इक कतरा...समुंदर भी हो सकता है   जब तक सांस चल रही, ज़रा दूर ही रहना हवा का इक झोंका...बवंडर भी हो सकता है   तुमने मान लिया कैसे, कि हारा हुआ है वो जो लौटकर आया है...सिकंदर भी हो सकता है   आग है तुम में... चलो मानता हूँ मैं सुरज का इक टुकड़ा...मेरे अंदर भी हो सकता है   मिलती नहीं है ग़र, मंजिल इन रास्तों पर खराब वक्त नहीं... मुकद्दर भी हो सकता है