आंखों से कही बात, अधूरी नहीं होती हर बात बतानी तो जरूरी नहीं होती जाता है कोई छोड़कर जो साथ कभी तो उसकी कमी ताउम्र भी पूरी नहीं होती...   देखा था उसको हमने, इक रोज़ कहीं पर वो बढ़ गया आगे, मैं रूका वहीं पर ना इज़हार था मेरा, ना इंकार था उसका वो है तो यहीं पर, किस्मत में नहीं पर...   देखा है कभी? आसमां से मिलती है जमीं अश्क सूखते हैं, मगर, रहती है नमी कृष्ण हों या राधा हों या राम-सीता हों किसी ना किसी को किसी की रहती है कमी...   आंखों से कही बात, अधूरी नहीं होती आदत बुरी होती है, मजबूरी नहीं होती आंखों से कही बात...