
धड़कन को सुनता है, सांसों से यारी नहीं करता
हमारा दिल कोई भी काम बेगारी नहीं करता
ना जाने क्यूँ? मेरे किरदार को झूठा समझते हैं
मैं दुनिया के रिवाज़ों की अदाकारी नहीं करता
लाख बातें हैं मेरी, मगर सच किसे मालूम है
कोई आं
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