धड़कन को सुनता है, सांसों से यारी नहीं करता
हमारा दिल कोई भी काम बेगारी नहीं करता
ना जाने क्यूँ? मेरे किरदार को झूठा समझते हैं
मैं दुनिया के रिवाज़ों की अदाकारी नहीं करता
लाख बातें हैं मेरी, मगर सच किसे मालूम है
कोई आंखों से आंखें पढ़ने की तैयारी नहीं करता
जो मेरे दिल में होता है जुबां पर ला ही देता हूँ
कोई पूंछे तो सही...
मैं लफ़्ज़ों की तरतीबों से कलाकारी नहीं करता
निगाहों को पढ़ता है, अल्फाजों से यारी नहीं करता
हमारा दिल कोई भी काम बेगारी नहीं करता...


