
सफल स्वयं की नजर में बनिये
दुनिया तो बेगानी है
सबके मन में असफलता की
कोई न कोई कहानी है
आंख तक रही दुनिया-दारी
दिल को कोई शौक नहीं
बाहर बिखरी रेत पड़ी है
भीतर बहता पानी है
रोज दिखावा करते हैं हम
खुद पर कोई गौर नहीं
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सफल स्वयं की नजर में बनिये
दुनिया तो बेगानी है
सबके मन में असफलता की
कोई न कोई कहानी है
आंख तक रही दुनिया-दारी
दिल को कोई शौक नहीं
बाहर बिखरी रेत पड़ी है
भीतर बहता पानी है
रोज दिखावा करते हैं हम
खुद पर कोई गौर नहीं