ख्वाहिश़ ना हो पूरी, तो आशिक रूठ जाता है
दिल फिसलता है, तभी तो टूट जाता है
गलीमत है शहर वालों लुटेरों से लुटे हो तुम
यहां तो गांव में अक्सर दरोगा लूट जाता है
सारी चाहतें अक्सर कभी पूरी नहीं होतीं
नदी का साथ देता हूं, किनारा छूट जाता है
ज़माने में, कचहरी में, दोनों में सुनवाई
जहां पर सच नहीं चलता, वहां पर झूठ जाता है..
_Amit Kumar Verma


