पलकों के बीच समुंदर में, इक छोटा सा अफ़साना है पल-पल तड़पा हूँ जिसके खातिर, बस उसका नज़राना है   कहते हैं कुछ लोग, सनम ख्वाबों में आया करती है मैं क्या जानूँ? मेरी तो वो नींद चुराया करती है   जीवन के मानसरोवर में, एक नौका तेरी बहती है व्यतिथ ह्दय स्पंदन में वो खूब हिलोरे भरती है   मानस सागर के तट पर जो तेरी धुंधली यादें हैं संगम रहित बीते अवसर की पीड़ा हैं फरियादें हैं   इक रोज कभी अपने यौवन से कृपा दृष्टि बरसा दो तुम मेरी इन छिछली आंखों में सागर सा प्रेम जगा दो तुम...