नाम बदलकर कातिल लिखना, ऐसी क्या मजबूरी है फैलाई अफ़वाह मेरी जो, वो भी तो आधी-अधूरी है हमने तुमको खुद में देखा, तुमने दुनिया - दारी में प्रीत में आंखें पढ़ना भी, बेहद बहुत जरूरी है...