याद तो होगा तुझे किस क़दर हम रातों को जगाया करते थे,
मेरी बेतुकी बातों पर तेरे हँसी के सलाम आया करते थे,
आखें बिलकुल तुझ जेसी है उसकी ,
बस तेरी परछाईं ही चुरा ली है,
तु ना सही, कोई तुझ सी ही पा ली है !
तुझ जैसी वो लम्बी है, बिलकुल तुझ जेसी ही चलती है ,
तुझ जेसे ही वो बिगड़ती है की बस मेरी बातों से ही संभलती है,
तेरी ज़िंदगी ना मिली तो क्या ..
तेरी ज़िंदगी ना मिली तो क्या,
तेरी यादें दिल में बसा ली है,
तु ना सही , कोई तुझ सी ही पा ली है !
कभी-कभी उसके भीगे बालों से, तेरी ख़ुशबू आ जाती है,
तुझसा ही वो हसती हैं तुझसा ही वो गाती है,
बस इसी छलावे में मेने, एक दुनिया सी बसा ली हैं,
तु ना सही, कोई तुझ सी ही पा ली हैं !
याद हैं मुझे वो वक़्त, जब तूने किसी और को चाहा था,
मेरे उड़ते सपनो को, ज़मीं पर ले गिराया था,
रोया था मैं पहली बार, पर तुझसे वो आँसु छुपाया था,
जिस आँसु में अपने हर सपने को बहाया था,
तुझे तो रोक ना पाया मैं, सवाल तेरे प्यार का था ,
बस इस बार फिर कोई ना ले जाए,
इसलिए, ये दुल्हन दुनिया से ही छुपा ली हैं,
तु ना सही, कोई तुझ सी ही पा ली हैं !

