तूने छुआ है तो वक़्त रुक गया है
असफल हो रही है क़ुदरत आज क्यूँ
तू ही तू दिख रही है हर जगह
ये दुनिया हो गयी है ओझल आज क्यूँ
नज़रें झुकायी है पहले भी तूने मेरी बातों पर हंस कर
फिर ये अदा लग रही है दिलकश आज क्यूँ
पहले भी आयी है तू क़रीब मेरे अनजाने में
तेरी करीबी से पड़ रही माथे सिलवट आज क्यूँ
इस कदर ना निहारो, कहीं दीवाना ना हो जाऊँ मैं
मेरा चेहरा पढ़ रही हैं तेरी आँखें कमबख़्त आज क्यूँ
तेरी साँसे गुजर रही है कानों से सावन की तरह
तुझे छू लेने की हुई है हिम्मत आज क्यूँ
हट जाना चाहता हूँ, सच कह रहा हूँ मैं
करवट ले रही है इस पल आज क्यूँ
ले छू लिया खुद ही मेरे हाथों ने तेरे गालों को
गुलाबी पड़ गयी है तेरी रंगत आज क्यूँ
ये जो तेरी गर्म हथेली ने छुआ है मेरे दिल पर
तो ठंडी पड़ गयी है धड़कने आज क्यूँ
फ़ासले मिट गए है ये लब लबों पर है इस वक्त
इजाज़त दे रही है तेरी फ़ितरत आज क्यूँ
एक अरसे से पड़ी थी मेरे सिरहाने जो थक कर
मुकम्मल हो रही है वो हसरत आज क्यूँ
हमेशा रहा कश्मकश में. आज जाना ये
तुझे भी है मोहोब्बत जो मुझसे लिपट गयी तू आज यूँ

