
ज़रा सोंचो यारों
वो दुनिया क्या होती
गले बंद होते
जुबां तंग होती
कोई शोर होता
ना आवाज़ होती
ज़रा सोंचो यारों
वो दुनिया क्या होती।।
ना नन्हीं सी चिड़िया
कहीँ चहचहाती
ना कानों में ठण्डी
हवा सरसराती
ये बारिश की बूँदें भी
बेसाज़ होती
कोई शोर होता
ना आवाज़ होती।।
यादें भी आतीं
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