हर कदम एक ख्वाब है कोई
जिसमें छुपता अजाब है कोई
साज है, पर नवाज़िशें कम हैं
दिल में बेज़ार राब्त है कोई
हम जिसे जानकर गले से मिले
वो ही निकला हिसाब है कोई
ग़म को रक्खा है जैसे फूलों में
तेरा अंदाज़-ए-ख़्वाब है कोई
अब न वो रौशनी, न साया है
घर में जैसे खराब है कोई
"दास्तान-ए-ग़ज़ल" सुना दूँ मैं
तू अगर हम-नवाब है कोई
