उसने कहा था मिलेंगे इक रोज,आज तलक आँखों में इंतज़ार बाकी है।जाने क्यूँ ये दिल कम्बख़्त थकता नहीं,और एक मज़ार पे इबादत बाकी है।कब्र थोड़ी आहिस्ता खोद 'अज़ल',अभी उसका इंतज़ार बाकी है।
उसने कहा था मिलेंगे इक रोज,आज तलक आँखों में इंतज़ार बाकी है।
जाने क्यूँ ये दिल कम्बख़्त थकता नहीं,और एक मज़ार पे इबादत बाकी है।
कब्र थोड़ी आहिस्ता खोद 'अज़ल',अभी उसका इंतज़ार बाकी है।