राय मुख़्तलिफ़ है हमारी,
ये तो कोई क़सूर नहीं।
तुम्हारी ख्वाहिश हम तुमसा सोचें,
ये तो हमें मंज़ूर नहीं।
साथ तुम्हारा, आरज़ू उनकी,
ये तो सही हुज़ूर नहीं।
ये तो हमें मंज़ूर नहीं ।
- अज़ल


राय मुख़्तलिफ़ है हमारी,
ये तो कोई क़सूर नहीं।
तुम्हारी ख्वाहिश हम तुमसा सोचें,
ये तो हमें मंज़ूर नहीं।
साथ तुम्हारा, आरज़ू उनकी,
ये तो सही हुज़ूर नहीं।
ये तो हमें मंज़ूर नहीं ।
- अज़ल