मिज़ाज खुश्क, हिचकी भी आई सी है,

मुमकिन है हमारा ख़याल आया होगा।

 

आहट भी दिल में हुई सी थी अभी,

मुमकिन है दरवाज़ा खटखटाया होगा।

 

चांदनी अभी कुछ और रोशनाई सी है,

मुमकिन है वो छत पे निकल आया होगा।

 

निगाहें उसे जो अब तलक तकती सी हैं,

यादों ने लाज़िम उसे भी सताया होगा।

 

हम जो फिरते हैं दरबदर खानाबदोश से,

मुमकिन है 'अज़ल' हमारी तस्वीर ने उसे

भी रुलाया होगा।

 

- अज़ल