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इश्क़ हमारा


इश्क़ हमारा कुछ ख़ास था,कभी दूर कभी पास था।

चले थे सफ़र-ए-इश्क़ में संग उसके,वापसी में सिर्फ हम,और एक ग़म-ज़दा लिबास था।

— अज़ल
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