इक सुर्ख़ रात की स्याही से सहमा,

ख़यालो में आई तेरी जुदाई से सहमा।


जानता हूँ तू मेरा नहीं, इल्म है मुझे,

जाने क्यूँ दिल अपनी परवानगी से सहमा।

 

- अज़ल