हमारे दरमियाँ ये दूरी बेमानी तो नहीं,
हम जो चाहें मिल जाए, इश्क़ है मनमानी तो नहीं।
गुरुर-ए-हुस्न तुम्हे की तुमसा नहीं मिलेगा,
कुँए से वाक़िफ़ होपूरी दुनिया तुमने जानी तो नहीं।
- अज़ल


हमारे दरमियाँ ये दूरी बेमानी तो नहीं,
हम जो चाहें मिल जाए, इश्क़ है मनमानी तो नहीं।
गुरुर-ए-हुस्न तुम्हे की तुमसा नहीं मिलेगा,
कुँए से वाक़िफ़ होपूरी दुनिया तुमने जानी तो नहीं।
- अज़ल