चल बता,

तेरे इश्क़ की 'इंतिहा' क्या है,

 

हमने कहा,

तू बता तेरे दिल की 'रज़ा' क्या है।

 

ये दिल, जो तूने इक रोज़ उठाया था इसको,

सोया नहीं,

 

तू बता,

और तेरी 'इल्तिजा' क्या है।    

 

- अज़ल