आरज़ू थी सिमट जाने की,

हसरत हद से गुज़र जाने की।



मुकद्दर कुछ अड़ियल सा हुआ,

ना भूले, ना पाया, ना गुज़रे,

बात दूर, सिमट जाने की।

 

- अज़ल