अक्सर पूछता है मुझमे नुख्स क्या है ,
कैसे कहें,
ख़ौफ़ है कहीं फिर ना बिखरने लगें।
बमुश्किल तैरे उस दरिया में,
मुनासिब है, अब जो डूबे तो मरने लगें।
- अज़ल


अक्सर पूछता है मुझमे नुख्स क्या है ,
कैसे कहें,
ख़ौफ़ है कहीं फिर ना बिखरने लगें।
बमुश्किल तैरे उस दरिया में,
मुनासिब है, अब जो डूबे तो मरने लगें।
- अज़ल