कभी कभी बहुत टूट जाता हूं
अर्श से फर्श तक बिखर जाता हूं
हर तिनके में टूूटे हुए तेरा अक्स दिखता है
फिर तेरी रुसवाई के डर से, सिमट जाता हूं ...


कभी कभी बहुत टूट जाता हूं
अर्श से फर्श तक बिखर जाता हूं
हर तिनके में टूूटे हुए तेरा अक्स दिखता है
फिर तेरी रुसवाई के डर से, सिमट जाता हूं ...