कब रास्ते कटे

कब उम्र अपनी

तेरे साथ ने 

कभी महसूस न होने दिया

न कोई फासले

न धूप लगी

न ठंड की कोई ठिठुरन थी

कब तूफान आए जाने

जाने कब बारिशें हुई

तेरे साथ सब कुछ गुज़र गया यूं ही

ग़म भी मेरे लिए खुशियां हो गईं ...