अंकुरित हो रही सुखी टहनियांप्रकृति सृजन नवीन कर रहीभोर जैसा सब होने लगा हैसांझ सारी ढल रही ...
अंकुरित हो रही सुखी टहनियांप्रकृति सृजन नवीन कर रही
भोर जैसा सब होने लगा हैसांझ सारी ढल रही ...